संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ट्यूनीशिया 16वां प्रमुख गैर–नाटो सहयोगी (MNNA) मनोनीत

Nato LogoLGKT: एक औपचारिक घोषणा के तहत 10 जुलाई 2015 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने ट्यूनीशिया को 16वां प्रमुख गैर–नाटो सहयोगी (MNNA) मनोनीत कर दिया। इस औपचारिक घोषणा के पहले ही बराक ओबामा ने ट्यूनीशिया को MNNA दर्जा दिए जाने के फैसले की घोषणा की थी जब 21 मई 2015 को ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति कैड एस्सेबसी  वाशिंगटन के दौरे पर थे। 

यह दर्जा टुनिशिया के लिए अहम है क्यूंकि इस दर्जे से कई प्रकार के विशेषाधिकार ट्यूनीशिया को प्राप्त हो गया है। जिसमे शामिल है प्रशिक्षण, सहयोगात्म अनुसंधान और विकास के लिए उपकरणों हेतु ऋण और अमेरिका द्वारा ट्यूनीशिया के लिए कुछ रक्षा वस्तुओं के वाणिज्यिक पट्टे हेतु विदेशी सैन्य वित्तपोषण।

क्या है गैर–नाटे सहयोगी दर्जा ?

यह दर्जा अमेरिकी सरकार वैसे करीबी सहयोगियों को देता है जिनके अमेरिका के सैन्य बलों के साथ रणनीतिक रिश्ते तो हैं लेकिन वे उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सदस्य नहीं हैं।

हालाँकि इस दर्जे अमेरिका के साथ स्वतः मैनुअल रक्षा संधि शामिल नहीं है परन्तु इसके हासिल होने के बाद कई प्रकार के सैन्य एवं  वित्तीय लाभ मिलते हैं जो गैर– नाटो देशों को नहीं मिलते।

इस दर्जे के दिए जाने का प्रारम्भ कांग्रेस ने 1989 में धारा 2350a में संशोधन कर किया था।

2015 के कैंप डेविड समिट के दौरान ओबोमा प्रशासन ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) देशों सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर को गैर–नाटो सहयोगी (MNNA) दर्जा देने पर विचार किया।

गैर–नाटो सहयोगी (MNNA) दर्जा प्राप्त करने वाले देश हैं: ट्यूनीशिया, ऑस्ट्रेलिया, मिस्र, इस्राइल, जापान, दक्षिण कोरिया, जॉर्डन, न्यूजीलैंड, अर्जेंटिना, बहरीन, फिलिपिंस, थाइलैंड, कुवैत, मोरक्को, पाकिस्तान, अफगानिस्तान।

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