ई-अदालत मिशन मोड परियोजना, द्वितीय चरण को मोदी सरकार की मंजूरी

E-court MMPLGKT: केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  की अध्यक्षता में 17 जुलाई 2015 को 1670 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से ई-अदालत मिशन मोड परियोजना के द्वितीय  चरण को मंजूरी दे दी। सरकार के इस फैसले से यूनिवर्सल कंप्‍यूटरीकरण, क्‍लाऊड कम्‍प्‍यूटिंग के इस्‍तेमाल, केस रिकार्डों के डिजीटीकरण एवं ई-फाईलिंग, ई-भुगतान के जरिए ई-सेवाओं की अधिक उपलब्‍धता सुनिश्चित होगी और मोबाइल एप्‍लीकेशन के जरिए अदालतें अधिक आईसीटी सक्षम होंगी।

क्या है मिशन मोड परियोजनाएं ?

मिशन मोड परियोजनाएं राष्ट्रीय ई-शासन योजना (एनईजीपी) के अंदर अलग अलग परियोजनाएं हैं जो इलेक्ट्रॉनिक शासन के एक पक्ष पर केन्द्रित हैं जैसे बैंकिंग, भूमि अभिलेख या वाणिज्यिक कर आदि। एनईजीपी के अंदर 'मिशन मोड' का अर्थ है वे परियोजनाएं जिनके उद्देश्य, विस्‍तार और कार्यान्वमयन समय सीमाएं तथा पड़ाव स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं तथा इनके परिणाम और सेवा बिस्तार मापन योग्य हैं। एनईजीपी में 31 मिशन मोड परियोजनाएं (एमएमपी) आती हैं, जिन्हें राज्य, केन्द्र या समेकित परियोजनाओं में पुन: वर्गीकृत किया गया है। प्रत्येक राज्य सरकार भी विशिष्ट आवश्यतकताओं के अनुसार 5 एमएमपी को परिभाषित कर सकती हैं।

ई-अदालत मिशन मोड परियोजना के उदेश्य एवं प्रावधान :

  • ई-अदालत परियोजना का उद्देश्‍य अदालतों को जरुरी  हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर एप्‍लीकेशन उपलब्ध कराना है ताकि वे नागरिकों को ई-सेवाएं दे सकें। न्‍यायपालिका को अदालतों की बेहतर निगरानी करने एवं  प्रबंध में सक्षम बना सकें।
  • प्रथम  चरण में 13000 से अधिक जिला और अधीनस्‍थ अदालतों और संबद्ध जिला अदालतों से संबंधित जानकारी एवं आंकड़ों  का कम्‍प्‍यूटरीकरण कर दिया गया  है।
  • अदालतें ई-अदालत पोर्टल (http://www.ecourts.gov.in) के जरिए वादी और जनता को अब ऑनलाइन ई-सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। जरुरी सेवाओं के अंतर्गत जैसे कार्य सूचियां, मामले की स्थिति और फैसले की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
  • वर्तमान में  5 करोड़ लम्बित और निर्णय हो चुके मामलों के सम्‍बन्‍ध में मामले की जानकारी तथा एक करोड़ आदेशों/ फैसलों की सूचना ऑनलाइन उपलब्‍ध है।
  • अदालत परिसरों में  वादी और वकीलों को  न्‍यायिक सेवा केन्‍द्रों के जरिए सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
  • अदालत सम्‍बन्‍धी जानकारी की ऑनलाइन पहुंच के सम्‍बन्‍ध में 24 करोड़ से ज्‍यादा अदालत सम्‍बन्‍धी जानकारी को ऑनलाइन रिकार्ड किया जा चुका है।
  • अदालत परिसरों में 5%  सौर ऊर्जा के इस्‍तेमाल का प्रस्‍ताव है।
  • तमाम अदालत परिसरों, जेलों में टच स्‍क्रीन आधारित टेलीफोन बूथ और विडियो कांफ्रेंसिंग की अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएगी।
  • अदालती  नोटिसों और सम्‍मनों में पारदर्शिता एवं इसे  निर्धारित समय पर पहुंचाने हेतु हस्‍त संसाधित सेवा उपकरण उपलब्ध कराये  जाएंगे।

इस  ई-अदालत परियोजना के दूसरे चरण की स्वीकृति से अदालतों के काम एवं प्रबंधन में मदद मिलेगी। अदालतों को बेहतर बनाने, मामले के व्‍यवस्‍थापन में मदद मिलेगी।

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